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बच्चो को शिक्षा के साथ सस्कार भी दे – विजय बघेल

रिसाली। भिलाई पब्लिक स्कूल मरोदा टैंक का वार्षिक उत्सव दूर्ग लोकसभा के सासद विजय बघेल के मुख्य अतिथि में सम्पन्न हुआ। विशिष्ट अतिथि के रूप में दूर्ग ग्रामीण के विधायक ललित चन्द्राकर ,साँसद प्रतिनिधि पप्पू चन्द्राकर भिलाई पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर एच.पी.एस. उप्पल और प्रिंसिपल हरविंदर कौर उप्पल शामिल हुई। उन्होंने हमेशा शिक्षा की गुणवत्ता और सांस्कृतिक धरोहर को एक साथ विकसित करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हरविंदर कौर उप्पल ने विद्यालय के छात्रों को अच्छे संस्कारों और उच्च शैक्षिक मानकों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान छात्रों द्वारा प्रस्तुत शानदार सांस्कृतिक नृत्य और संगीत कार्यक्रम ने सभी दर्शकों का दिल छू लिया। बच्चों ने रंग-बिरंगे परिधानों में अपनी कला का प्रदर्शन किया, जिससे पूरा वातावरण उल्लासित हो गया। संगीत और नृत्य के अलावा विद्यार्थियों ने अपनी सृजनात्मकता का परिचय भी दिया। कार्यक्रम का उद्घाटन डायरेक्टर एच.पी.एस. उप्पल और प्रिंसिपल हरविंदर कौर उप्पल ने किया। इसके बाद, पुरस्कार वितरण समारोह हुआ, जिसमें विद्यार्थियों को उनकी मेहनत और उत्कृष्टता के लिए पुरस्कार और चेक प्रदान किए गए। इस समारोह में छात्रों के अभिभावक भी उपस्थित थे, जो अपने बच्चों की सफलता पर गर्व महसूस कर रहे थे।मुख्य अतिथि विजय बघेल ने अपने संबोधन में कहा की बच्चो को शिक्षा के साथ सस्कार भी दे, “यह आयोजन शिक्षा और संस्कृति का सुंदर मिश्रण है। हम सभी को मिलकर बच्चों को एक अच्छा नागरिक और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।” इस शानदार कार्यक्रम के आयोजन में विद्यालय के समस्त शिक्षक, सहायक कर्मचारी और प्रशासनिक टीम का योगदान रहा। कार्यक्रम की मास्टर ऑफ सेरेमनी का दायित्व निभाया- पुष्पा भोई, शर्ली प्रिंस, दीपक कुमार राय और काव्या वर्मा ने। उन्होंने कार्यक्रम को अत्यंत व्यवस्थित और आकर्षक रूप से प्रस्तुत किया। डायरेक्टर एच.पी.एस. उप्पल ने कार्यक्रम के दौरान छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कारों की भी आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल अकादमिक सफलता नहीं, बल्कि बच्चों को समाज का जिम्मेदार नागरिक बनाना है।” प्रिंसिपल हरविंदर कौर उप्पल ने शिक्षा के महत्व को समझाते हुए कहा, “हम बच्चों को सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उन्हें जीवन के संघर्षों से निपटने की कला भी सिखाते हैं। एक अच्छे इंसान बनने की दिशा में यह हमारा सबसे बड़ा योगदान है*

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